भारत में होगा Global South का पहला AI Summit, नई दिल्ली में फरवरी 2026 में आयोजन

Artificial Intelligence (AI) अब मानव सभ्यता को नया रूप दे रही है। विशेषकर विकासशील देशों के लिए AI एक बड़ा अवसर है, जिससे वे पारंपरिक विकास चरणों को पार कर शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ा सकते हैं। बहुभाषी और विभिन्न प्रारूपों में काम करने की क्षमता AI को बड़े पैमाने पर लोगों के लिए उपयोगी बनाती है।

पिछले चार वर्षों में कई वैश्विक कोशिशें हुई हैं ताकि AI का उपयोग जिम्मेदार तरीके से हो। G20 AI Principles, UN और GPAI resolutions, African Declaration on AI और Hamburg Declaration on Responsible AI जैसे प्रयास यह दिखाते हैं कि अब दुनिया मानती है कि AI का असर सीमाओं से परे है और इसके लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है।

फिर भी एक बड़ी चुनौती मौजूद है। AI से जुड़ी अधिकांश तकनीक, प्रतिभा और संसाधन अभी कुछ ही देशों और बड़ी कंपनियों के पास केंद्रित हैं। यह Global AI Divide खासकर Global South के देशों को स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक जरूरतों के अनुसार AI समाधान बनाने से रोकता है।

इसके साथ ही AI नई समस्याएँ भी खड़ी कर रहा है — रोजगार के ढांचे में बदलाव, समाज में बढ़ते पक्षपात और अधिक ऊर्जा की खपत जैसी चुनौतियाँ सामने हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब वैश्विक चर्चाओं को केवल वादों से आगे बढ़कर आम लोगों को लाभ देने वाले परिणामों पर ध्यान देना चाहिए।

भारत 19–20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में India–AI Impact Summit 2026 की मेजबानी करेगा। यह Global South में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक AI Summit होगा। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने France AI Action Summit में की।

यह सम्मेलन UK AI Safety Summit, AI Seoul Summit, France AI Action Summit और Africa Global AI Summit के परिणामों को आगे बढ़ाएगा। इसमें नई पहलों और साझेदारियों पर काम होगा, ताकि AI मानवता के हित में काम कर सके, समावेशी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे और पृथ्वी की रक्षा में मदद करे।

यह शिखर सम्मेलन विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूत करेगा, ताकि AI के लाभ कुछ चुनिंदा शक्तिशाली देशों तक सीमित न रहें, बल्कि पूरी दुनिया में समान रूप से पहुंच सकें।

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