भारत में Bare PCB Manufacturing तेज़ विकास के चरण में

भारत की electronics manufacturing कहानी अब एक नए और अधिक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है। अब तक ध्यान मुख्य रूप से final product assembly पर था, लेकिन अब फोकस core electronic components की ओर शिफ्ट हो रहा है। इनमें सबसे अहम है bare Printed Circuit Board यानी Bare PCB। हालिया आकलन बताते हैं कि भारत का bare PCB manufacturing sector FY 2029 तक लगभग 45 प्रतिशत CAGR की दर से बढ़ सकता है।

वर्तमान में भारत का bare PCB market लगभग 5 billion dollars का है, लेकिन इसमें से करीब 88 प्रतिशत PCBs आयात किए जाते हैं। घरेलू उत्पादन अभी बहुत सीमित है और FY 2024 में यह केवल 0.6 billion dollars के आसपास है। आने वाले वर्षों में इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। अनुमान है कि FY 2029 तक domestic production बढ़कर लगभग 3.8 billion dollars तक पहुँच जाएगा, जिससे import dependence में स्पष्ट कमी आएगी।

इस तेज़ वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण भारत के electronics industry का लगातार विस्तार है। देश में कुल electronics production लगभग 25 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रहा है और FY 2030 तक इसके 450 billion dollars तक पहुँचने की उम्मीद है। जैसे-जैसे भारत में अधिक electronic devices बनेंगे, वैसे-वैसे local components जैसे PCBs की मांग भी बढ़ेगी। इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य electronics imports को लगभग 53 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत तक लाने का है।

PCB sector के भीतर भी एक महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। पहले demand मुख्य रूप से basic single-layer PCBs की थी, जो low-value होते हैं और जिनमें margins कम होते हैं। अब growth complex multilayer PCBs और flexible PCBs में देखी जा रही है। इनका उपयोग electric vehicles, telecom equipment, industrial electronics और compact consumer devices में होता है। अनुमान है कि multilayer PCBs value terms में लगभग 27 प्रतिशत CAGR से और flexible PCBs लगभग 30 प्रतिशत CAGR से बढ़ेंगे। ये products technology-intensive हैं और इनमें margins भी बेहतर होते हैं।

इस बदलाव को संभव बनाने में government policy support की भूमिका बहुत अहम रही है। Electronics Component Manufacturing Scheme (ECMS), जिसे 2025 में notified किया गया, का कुल outlay लगभग 2.6 billion dollars है। इसके तहत अब तक 24 projects में करीब 1.5 billion dollars के investments को मंजूरी दी जा चुकी है। इन projects का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में लगभग 12 billion dollars का production और करीब 17,000 jobs का सृजन है। यह scheme turnover-linked है, यानी incentives तभी मिलते हैं जब कंपनियाँ actual production और billing शुरू करती हैं।

इसके अलावा Production Linked Incentive (PLI) schemes, anti-dumping duties और state-level incentives मिलकर capital cost का लगभग 55 से 60 प्रतिशत तक कवर कर सकते हैं। इससे bare PCB manufacturing जैसे capital-intensive sector में निवेश करना आर्थिक रूप से संभव हो जाता है। बड़े और scalable manufacturers के लिए Return on Capital Employed (ROCE) लगभग 18 से 20 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है।

Industry experts का मानना है कि भारत electronics assembly के चरण को काफी हद तक पार कर चुका है। अब अगला चरण higher-value components का है। Bare PCBs, laminates और camera modules जैसे components इस transition का आधार हैं। इन क्षेत्रों में सफलता न केवल imports घटाने के लिए ज़रूरी है, बल्कि technology depth बढ़ाने, supply chain मजबूत करने और skilled employment पैदा करने के लिए भी आवश्यक है।

आने वाले वर्षों में bare PCB manufacturing की वृद्धि भारत की broader semiconductor और electronics ambitions की नींव बनेगी। जैसे-जैसे घरेलू capability बढ़ेगी, भारतीय कंपनियाँ local और global दोनों markets को बेहतर तरीके से सेवा दे पाएँगी। Assembly से components की ओर यह बदलाव भारत को केवल assembling nation से आगे ले जाकर एक मजबूत electronics manufacturing hub बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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