भारत में साफ ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए नया प्लान तैयार

भारत में ग्रीन हाइड्रोजन को साफ और टिकाऊ तरीके से बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया रोडमैप तैयार किया है। ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन माना जा रहा है, जो देश को प्रदूषण कम करने और जलवायु लक्ष्य पूरे करने में मदद करेगा।

स्टडी (by IIT Madras) में एक मशीन पर खास ध्यान दिया गया है जिसे PEM इलेक्ट्रोलाइज़र कहा जाता है। यह मशीन पानी को तोड़कर हाइड्रोजन बनाती है। यह पुराने सिस्टम से ज्यादा अच्छी तरह काम करती है और बड़े स्तर पर हाइड्रोजन बना सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि मशीन की डिजाइन और उसमें इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री यह तय करती है कि उसके पूरे जीवन में कितना प्रदूषण होगा। कुछ मशीनें बनते समय ज्यादा प्रदूषण करती हैं, लेकिन बाद में बहुत साफ हाइड्रोजन देती हैं। इसलिए सिर्फ शुरुआती खर्च नहीं, सही तकनीक चुनना जरूरी है।

यह शोध CSTEP के साथ मिलकर किया गया और Energy & Fuels नाम की जर्नल में छपा है। इसमें यह भी देखा गया है कि भारत 2030 तक हर साल 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लक्ष्य को कैसे पूरा करेगा और इसके लिए कितनी सामग्री और संसाधन चाहिए होंगे।

स्टडी ने एक आसान रेटिंग सिस्टम भी सुझाया है—प्लैटिनम, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज। इससे पता चलेगा कि कौन-सी हाइड्रोजन कितनी साफ है। शोध में यह भी बताया गया है कि भारत को इस क्षेत्र में जरूरी कच्चा माल कैसे सुरक्षित रखना चाहिए।

यह नया रोडमैप दिखाता है कि भारत अपना ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर कैसे समझदारी और साफ तरीके से बढ़ा सकता है। इससे पर्यावरण को भी फायदा होगा और भविष्य की ऊर्जा भी सुरक्षित रहेगी।

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