दशकों पुरानी पहेली सुलझी: वैज्ञानिकों ने बताया — प्रकाश संश्लेषण असल में कैसे शुरू होता है
तारीख: 13 अक्टूबर 2025
स्रोत: भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु और कैलटेक, अमेरिका
प्रकाशन: प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (PNAS)
धरती पर जीवन की सबसे अद्भुत प्रक्रिया — प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) — आखिर कैसे शुरू होती है, यह रहस्य अब जाकर पूरी तरह समझ में आया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि पौधों में जब सूरज की रोशनी ऊर्जा में बदलती है, तो यह ऊर्जा केवल एक ही रास्ते से गुजरती है, जबकि वहाँ दो समान रास्ते मौजूद होते हैं। दशकों से यह सवाल वैज्ञानिकों को परेशान कर रहा था — आखिर दूसरा रास्ता बंद क्यों रहता है? अब भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) के वैज्ञानिकों ने इसका जवाब खोज लिया है।
प्रकाश संश्लेषण की शुरुआत पौधे की कोशिका में मौजूद एक सूक्ष्म संरचना से होती है, जिसे फोटोसिस्टम-II (Photosystem II) कहा जाता है। यह सूरज की रोशनी को पकड़कर पानी के अणुओं को तोड़ता है — जिससे ऑक्सीजन, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन निकलते हैं। यही इलेक्ट्रॉन आगे पौधे की ऊर्जा श्रृंखला को चलाते हैं। इस संरचना में दो समान शाखाएँ होती हैं — D1 और D2 — जिनसे इलेक्ट्रॉन गुजर सकते हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ D1 शाखा काम करती है, जबकि D2 लगभग निष्क्रिय रहती है।
IISc और Caltech के वैज्ञानिकों ने सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन, क्वांटम गणनाओं और मार्कस सिद्धांत (Marcus Theory) का उपयोग कर दोनों शाखाओं की तुलना की। नतीजा यह मिला कि — D2 शाखा में ऊर्जा अवरोध (Energy Barrier) बहुत ऊँचा है, जिससे इलेक्ट्रॉन आगे नहीं बढ़ पाते। D1 शाखा में यह बाधा बहुत कम है, इसलिए ऊर्जा आसानी से बहती है। D2 शाखा में इलेक्ट्रॉन प्रवाह का प्रतिरोध 100 गुना अधिक पाया गया। यानी प्रकृति ने दो “सड़कें” बनाई हैं, लेकिन एक को जानबूझकर बंद रखा, ताकि ऊर्जा एक ही दिशा में सटीक और स्थिर रूप से बहे।
IISc के प्रोफेसर प्रबल के. मइती कहते हैं — “यह प्रकृति की अद्भुत डिजाइन है। इस एकतरफ़ा प्रवाह से ऊर्जा का नुकसान नहीं होता और पूरा सिस्टम स्थिर रहता है।” Caltech के प्रोफेसर विलियम गॉडर्ड के अनुसार, “हम केवल प्रकाश संश्लेषण को देख नहीं रहे हैं, बल्कि अब उसकी ब्लूप्रिंट समझने लगे हैं।”
इस खोज से वैज्ञानिक अब ऐसी कृत्रिम पत्तियाँ (Artificial Leaves) और सौर ईंधन प्रणाली (Solar Fuel Systems) बना सकेंगे, जो ठीक पौधों की तरह सूरज की रोशनी से ऊर्जा पैदा करेंगी। भविष्य में यह तकनीक — स्वच्छ हाइड्रोजन ईंधन बनाने, ऊर्जा-कुशल सौर पैनल तैयार करने, और कार्बन-मुक्त ऊर्जा विकसित करने में मदद कर सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि D2 शाखा को कृत्रिम रूप से संशोधित किया जाए, तो दोनों मार्ग सक्रिय हो सकते हैं — जिससे ऊर्जा प्रवाह की क्षमता दोगुनी हो जाएगी।
यह शोध बताता है कि भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान का संयोजन ही प्रकृति के रहस्यों को सुलझाने की कुंजी है। यह न केवल पौधों के जीवन को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि सौर ऊर्जा से चलने वाले भविष्य की ओर भी इशारा करता है।
हर साँस में जो ऑक्सीजन हम लेते हैं, हर हरी पत्ती जो हमें जीवन देती है — वह इसी प्रक्रिया की देन है। अब जब वैज्ञानिकों ने यह समझ लिया है कि यह प्रक्रिया वास्तव में कैसे शुरू होती है, हम एक कदम और आगे हैं — सूरज की रोशनी को सीधे स्वच्छ ऊर्जा में बदलने की दिशा में।
मुख्य संदेश: प्रकाश संश्लेषण में ऊर्जा केवल एक मार्ग से बहती है — क्योंकि दूसरा मार्ग प्रकृति ने स्वयं बंद कर रखा है। यही वह रहस्य है जिसने पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाया।
